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पेलà¥à¤µà¤¿à¤• फ़à¥à¤²à¥‹à¤°: महिलाओं के शरीर का à¤à¤• रहसà¥à¤¯à¤®à¤¯ हिसà¥à¤¸à¤¾
अकà¥à¤¸à¤° लोग सलाह देते हैं कि पेलà¥à¤µà¤¿à¤• फà¥à¤²à¥‹à¤° मज़बूत होना चाहिà¤. लेकिन पेलà¥à¤µà¤¿à¤• सिसà¥à¤Ÿà¤® काम कैसे करता है इसके बारे में पà¥à¤–़à¥à¤¤à¤¾ तौर पर आज तक कोई नहीं जान पाया है.
पेलà¥à¤µà¤¿à¤• फà¥à¤²à¥‹à¤° मरà¥à¤¦à¥‹à¤‚ में à¤à¥€ होता है. लेकिन, महिलाओं की तरह उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ बचà¥à¤šà¥‡ को जनà¥à¤® नहीं देना पड़ता. इसीलिठउनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ महिलाओं की तरह परेशानी का सामना à¤à¥€ नहीं करना पड़ता.
कà¥à¤¯à¤¾ है पेलà¥à¤µà¤¿à¤• फ़à¥à¤²à¥‹à¤°
पेलà¥à¤µà¤¿à¤• फà¥à¤²à¥‹à¤° शरीर का वो हिसà¥à¤¸à¤¾ है, जिसमें बà¥à¤²à¥ˆà¤¡à¤°, यूटेरस, वजाइना और रेकà¥à¤Ÿà¤® होते हैं. ये हिसà¥à¤¸à¤¾ महिलाओं के शरीर के सबसे अहम अंगों को सहेज कर रखता है. उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ सही तौर पर काम करने में मदद करता है.
लेकिन, दà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ à¤à¤° में लाखों महिलाओं को पेलà¥à¤µà¤¿à¤• फà¥à¤²à¥‹à¤° में कोई ना कोई परेशानी होती है. ये औरत के शरीर का बहà¥à¤¤ अहम हिसà¥à¤¸à¤¾ है. लेकिन, इसके बावजूद इस पर रिसरà¥à¤š ना के बराबर की गई है.
अमरीका की मिशिगन यूनिवरà¥à¤¸à¤¿à¤Ÿà¥€ में पेलà¥à¤µà¤¿à¤• फà¥à¤²à¥‹à¤° रिसरà¥à¤šà¤° और गाइनेकोलॉजिसà¥à¤Ÿ जेनिस मिलर का कहना है कि शारीरिक संरचना में दिमाग़ के बाद पेलà¥à¤µà¤¿à¤• फà¥à¤²à¥‹à¤° ही सबसे जटिल है.
इसके काम के तरीक़े पर अà¤à¥€ तक साफ़ तौर पर किसी रिसरà¥à¤š का नतीजा सामने नहीं आ पाया है.
शोधकरà¥à¤¤à¤¾à¤“ं के लिठये अà¤à¥€ तक शरीर का रहसà¥à¤¯à¤®à¤¯ हिसà¥à¤¸à¤¾ बना हà¥à¤† है. पेलà¥à¤µà¤¿à¤• सिसà¥à¤Ÿà¤® कोख की हडà¥à¤¡à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ के बीच छिपा होता है, जहां तक पहà¥à¤‚चना आसान नहीं है.
इसके अलावा शारीरिक संरचना में हरेक चीज़ à¤à¤• दूसरे से जà¥à¤¡à¤¼à¥€ है. मशहूर जॉनà¥à¤¸ हॉपकिंस यूनिवरà¥à¤¸à¤¿à¤Ÿà¥€ में गाइनेकोलॉजी की पà¥à¤°à¥‹à¤«à¤¼à¥‡à¤¸à¤° विकà¥à¤Ÿà¥‹à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ हांडा का कहना है कि पेलà¥à¤µà¤¿à¤• फ़à¥à¤²à¥‹à¤° की कोई à¤à¥€ परेशानी महिला की पूरी ज़िंदगी पर असर डालती है.
चूंकि इस परेशानी से ज़िंदगी को ख़तरा नहीं होता इसीलिठना तो आम लोग इस पर धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ देते हैं और ना ही रिसरà¥à¤šà¤°à¥à¤¸ ने इसे आज तक गंà¤à¥€à¤°à¤¤à¤¾ से लिया.
रिसरà¥à¤š में कमी की वजह
साइंस ने हर लिहाज़ से हर कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤° में बेपनाह तरकà¥à¤•़ी कर ली है. लेकिन कà¥à¤¯à¤¾ वजह है कि महिलाओं के शरीर के इतने अहम हिसà¥à¤¸à¥‡ पर अà¤à¥€ तक कोई सारà¥à¤¥à¤• रिसरà¥à¤š नहीं हो पाई. पà¥à¤°à¥‹à¤«à¤¼à¥‡à¤¸à¤° हांडा का कहना है कि बदक़िसà¥à¤®à¤¤à¥€ से सेहत के कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤° में आज तक जितनी रिसरà¥à¤š हà¥à¤ˆ हैं, वो मरà¥à¤¦à¥‹à¤‚ पर हà¥à¤ˆ हैं.
लगà¤à¤— सारी रिसरà¥à¤š मरà¥à¤¦ और औरत दोनों की शारीरिक संरचना को à¤à¤• जैसा मानकर की गई है. महिलाओं के शरीर पर अलग से रिसरà¥à¤š की ज़रूरत कम ही समà¤à¥€ गई है.
इसके अलावा औरतों के शरीर या उनके गà¥à¤ªà¥à¤¤ अंगों और ज़नाना बीमारियों के बारे में बात करने में हिचक महसूस की जाती रही जिसके चलते कà¤à¥€ खà¥à¤²à¤•र आवाज़ उठी ही नहीं कि महिलाओं के शरीर को मरà¥à¤¦à¥‹à¤‚ से अलग माना जाठऔर उन पर अलग से रिसरà¥à¤š की जाà¤.
पà¥à¤°à¤œà¤¨à¤¨ के दौरान चोटें
à¤à¤®.आर.आई इमेज के ज़रिठही पता चला कि डिलिवरी के दौरान कई महिलाओं की लेवेटर à¤à¤¨à¥€ नाम की मांसपेशी फट जाती है जिसकी वजह से कोख का à¤à¤• हिसà¥à¤¸à¤¾ बड़ा होकर वजाइना से बाहर आ जाता है. इससे पेलà¥à¤µà¤¿à¤• फà¥à¤²à¥‹à¤° कमज़ोर पड़ जाता है.
हालांकि ये कितनी महिलाओं में और कैसे होता है इसके आंकड़े अलग हैं. à¤à¤• रिसरà¥à¤š के मà¥à¤¤à¤¾à¤¬à¤¿à¤•़ 13 से 36 फ़ीसद औरतों में à¤à¤¸à¤¾ वजाइना के ज़रिठबचà¥à¤šà¤¾ जनने के दौरान होता है. जबकि पà¥à¤°à¥‹à¤«à¤¼à¥‡à¤¸à¤° मिलर की रिसरà¥à¤š के मà¥à¤¤à¤¾à¤¬à¤¿à¤•़ ये आंकड़ा 5 से 15 फीसद महिलाओं का है.
दिलचसà¥à¤ª बात ये है कि लेवेटर à¤à¤¨à¥€ मांसपेशी के फटने की ख़बर मरीज़ या डॉकà¥à¤Ÿà¤° दोनों को नहीं लग पाती. बचà¥à¤šà¤¾ पैदा करते समय महिलाओं के अंदरूनी अंगों में कई तरह की छोटी-छोटी चोटें लगती हैं. इनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ सामानà¥à¤¯ माना जाता है.
लेकिन नई रिसरà¥à¤š के बाद पेलà¥à¤µà¤¿à¤• फà¥à¤²à¥‹à¤° से जà¥à¤¡à¤¼à¥€ समसà¥à¤¯à¤¾à¤à¤‚ सà¥à¤²à¤à¤¾à¤¨à¥‡ में मदद मिलेगी.
हालांकि पेलà¥à¤µà¤¿à¤• फà¥à¤²à¥‹à¤° मज़बूत करने के लिठकेगल à¤à¤•à¥à¤¸à¤°à¤¸à¤¾à¤‡à¤œà¤¼ करने का सà¥à¤à¤¾à¤µ दिया जाता है.
लेकिन महिलाओं के लिठज़ख़à¥à¤®à¥€ मांसपेशियों के साथ à¤à¤¸à¥€ कोई à¤à¤•à¥à¤¸à¤°à¤¸à¤¾à¤‡à¤œà¤¼ कारगर नहीं है.
अà¤à¥€ तक की रिसरà¥à¤š के मà¥à¤¤à¤¾à¤¬à¤¿à¤•़ पेलà¥à¤µà¤¿à¤• फà¥à¤²à¥‹à¤° से संबंधित मà¥à¤¦à¥à¤¦à¥‹à¤‚ के लिठउमà¥à¤°, मोटापा और वजाइना के रासà¥à¤¤à¥‡ बचà¥à¤šà¤¾ पैदा करना अहम है.
पेलà¥à¤µà¤¿à¤• फ़à¥à¤²à¥‹à¤° डिसऑरà¥à¤¡à¤°
पà¥à¤°à¥‹à¤«à¤¼à¥‡à¤¸à¤° हांडा का कहना है कि ज़à¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾à¤¤à¤° महिलाओं को पेलà¥à¤µà¤¿à¤• फ़à¥à¤²à¥‹à¤° डिसऑरà¥à¤¡à¤° की समसà¥à¤¯à¤¾ नहीं होती. कà¥à¤› में बहà¥à¤¤ कम होती है. लेकिन वो ख़तरनाक नहीं होती.
बहरहाल तसलà¥à¤²à¥€ की बात ये है कि वैजà¥à¤žà¤¾à¤¨à¤¿à¤• महिलाओं की शारीरिक संरचना के साथ-साथ पेलà¥à¤µà¤¿à¤• फ़à¥à¤²à¥‹à¤° सिसà¥à¤Ÿà¤® और उससे जà¥à¤¡à¤¼à¥€ बीमारियों के बारे में पता लगा रहे हैं. उनके निवारण के लिठदवाà¤à¤‚ बनाने का काम किया जा रहा है.
पेलà¥à¤µà¤¿à¤• फ़à¥à¤²à¥‹à¤° से जà¥à¤¡à¤¼à¥€ समसà¥à¤¯à¤¾à¤à¤‚ बहà¥à¤¤ आम हैं. अमरीका में क़रीब à¤à¤• चौथाई महिलाओं को ये समसà¥à¤¯à¤¾ रहती है.
पेलà¥à¤µà¤¿à¤• डिसऑरà¥à¤¡à¤° के चलते पेशाब के लिठदबाव जलà¥à¤¦à¥€-जलà¥à¤¦à¥€ बनने लगता है. तेज़ हंसने, खांसने या छींक आने पर पेशाब निकल जाता है. इसके अलावा पेलà¥à¤µà¤¿à¤• फ़à¥à¤²à¥‹à¤° पर मौजूद अंग बाहर की ओर निकल आता है. à¤à¤• अनà¥à¤¯ सà¥à¤Ÿà¤¡à¥€ के मà¥à¤¤à¤¾à¤¬à¤¿à¤•़ तो बà¥à¤°à¤¿à¤Ÿà¥‡à¤¨ में 42 फ़ीसद महिलाओं को पेशाब जलà¥à¤¦à¥€ छूट जाने की शिकायत है.
कà¥à¤› सà¥à¤Ÿà¤¡à¥€ पेलà¥à¤µà¤¿à¤• फà¥à¤²à¥‹à¤° डिसऑरà¥à¤¡à¤° के लिठबढ़ती उमà¥à¤° को ज़िमà¥à¤®à¥‡à¤¦à¤¾à¤° मानती हैं तो कà¥à¤› नहीं मानतीं.
इनकी रिसरà¥à¤š के मà¥à¤¤à¤¾à¤¬à¤¿à¤•़ जवान लड़कियों को à¤à¥€ ये दिक़à¥à¤•त होना आम बात है. यहां तक की महिला खिलाड़ियों को à¤à¥€ पेशाब छूट जाने की समसà¥à¤¯à¤¾ का सामना करना पड़ता है. कई मरà¥à¤¤à¤¬à¤¾ पेट पर दबाव पड़ने की वजह से à¤à¥€ पेशाब निकल जाता है.
ज़रूरी है जागरूकता
पेलà¥à¤µà¤¿à¤• मांसपेशियां मज़बूत करने के लिठकई तरह की à¤à¤•à¥à¤¸à¤°à¤¸à¤¾à¤‡à¤œà¤¼ करने को कहा जाता है. साथ ही दिनचरà¥à¤¯à¤¾ में बदलाव लाकर à¤à¥€ इस समसà¥à¤¯à¤¾ पर काबू पाया जा सकता है.
इसके अलावा कई तरह की डिवाइस का सहारा à¤à¥€ लिया जाता है. मसलन बà¥à¤²à¥ˆà¤¡à¤° को सपोरà¥à¤Ÿ करने के लिठवजाइना के ज़रिठपेसरी नाम की डिवाइस शरीर में दाखिल कर दी जाती है.
मिडà¥à¤°à¥‡à¤¥à¥à¤°à¤² सà¥à¤²à¤¿à¤‚ज नाम की डिवाइस à¤à¥€ à¤à¤• अचà¥à¤›à¤¾ विकलà¥à¤ª है. लेकिन इसके लिठऑपरेशन की ज़रूरत पड़ती है.
पेलà¥à¤µà¤¿à¤• फ़à¥à¤²à¥‹à¤° से संबंधित अà¤à¥€ तक जितनी à¤à¥€ रिसरà¥à¤š के नतीजे सामने आठहैं उनसे सà¤à¥€ रिसरà¥à¤šà¤° काफ़ी खà¥à¤¶ हैं.
उनका कहना है कि शà¥à¤—र, दिल और दिमाग की बीमारियों पर लंबे समय से रिसरà¥à¤š हो रही हैं. लेकिन महिलाओं की कोख को लेकर रिसरà¥à¤š का कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤° नया है. इसके बावजूद रिसरà¥à¤š तेज़ी से आगे बढ़ रही है और नतीजे à¤à¥€ काफ़ी बेहतर हैं.
पà¥à¤°à¥‹à¤«à¤¼à¥‡à¤¸à¤° मिलर का कहना है कि अगर लड़कियों को किशोरावसà¥à¤¥à¤¾ में ही उनके शरीर की आंतरिक संरचना और मांसपेशियों के बारे में जानकारी दे दी जाठतो बहà¥à¤¤ सी समसà¥à¤¯à¤¾à¤“ं को समय रहते ही ख़तà¥à¤® किया जा सकता है.
मसलन अगर पेलà¥à¤µà¤¿à¤• मांसपेशियों की जानकारी उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ पहले से हो, तो केगल à¤à¤•à¥à¤¸à¤°à¤¸à¤¾à¤‡à¤œà¤¼ के ज़रिठवो इन मांसपेशियों को मज़बूत कर सकती हैं. कई बार जानकारी के अà¤à¤¾à¤µ में à¤à¥€ बीमारियां बढ़ जाती हैं.
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